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अमित शाह मार्च 2026 तक माओवादियों को समाप्त करेंगे ?

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संचार क्रांति ने ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता’ का विकास जिस तेज़ी के साथ किया है, उसने मानव समाज में क्रांति ला दिया है. उथल-पुथल मचा दिया है. इसी कड़ी में एलन मस्क के ग्रोक-3 है, जिसने एक सप्ताह से भी कम समय में अपने बेबाक़ अंदाज से जिस तरह भारत के राजनीतिक क्षेत्रों में हलचल मचा दिया है, वह भाजपा आईटी सेल के सर पर बल ला दिया है. उसके रोज़ के हज़ारों झूठ का रोज़ पर्दाफ़ाश कर रहा है. इसी कड़ी में हमने भी माओवादियों से जुड़े चंद सवाल पूछ डाले हैं. उसका जवाब निम्नोक्त है.

माओवाद भारत में नक्सली आंदोलन है, जो माओवादी विचारधारा का पालन करता है और ग्रामीण, आदिवासी क्षेत्रों में सक्रिय है. यह भारतीय सरकार, जमींदारों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के खिलाफ लड़ता है, गरीब और उत्पीड़ित वर्गों की स्थिति सुधारने और कम्युनिस्ट राज्य स्थापित करने के लिए. अमित शाह ने मार्च 2026 तक माओवाद को समाप्त करने का लक्ष्य रखा है, और सरकार इस दिशा में प्रगति कर रही है, लेकिन परिणाम कई कारकों पर निर्भर है.

माओवाद क्या है और इसका वर्तमान स्थिति

माओवाद, भारत में नक्सली आंदोलन के रूप में जाना जाता है, जो माओवादी विचारधारा का पालन करता है. यह मुख्य रूप से ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में सक्रिय है, जहां यह सरकार और स्थानीय शक्तियों के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष छेड़ता है. माओवादियों का उद्देश्य गरीब और उत्पीड़ित वर्गों, विशेष रूप से किसानों और आदिवासियों, की स्थिति सुधारना और एक कम्युनिस्ट राज्य स्थापित करना है.

यह किससे और क्यों लड़ता है ?

माओवादी भारतीय सरकार, जमींदारों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के खिलाफ लड़ता है, क्योंकि वे मानते हैं कि ये संस्थाएं सामाजिक और आर्थिक असमानता को बढ़ावा देती हैं. उनका मानना है कि वर्तमान प्रणाली फिजूल और सामंती है, और वे इसे उखाड़ फेंकने के लिए सशस्त्र संघर्ष और ‘लोकयुद्ध’ की रणनीति अपनाते हैं. विशेष रूप से, वे आदिवासी समुदायों के अधिकारों की रक्षा के लिए लड़ते हैं, जो वे मानते हैं कि निजी निगमों और राजनीतिक वर्ग द्वारा शोषित हैं.

अमित शाह मार्च 2026 तक इसे समाप्त करेंगे ?

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मार्च 31, 2026 तक माओवाद को समाप्त करने का लक्ष्य रखा है. सरकार ने हाल के वर्षों में माओवादी हिंसा और प्रभावित जिलों की संख्या में कमी लाने में सफलता हासिल की है. हाल के आंकड़ों के अनुसार, माओवादी हिंसा की घटनाएं 2009 से 2021 के बीच 77% कम हुई हैं, और प्रभावित जिलों की संख्या 96 से घटकर लगभग 46 हो गई है. ([Why has Maoist violence subsided in India?]). हालांकि, इस लक्ष्य को प्राप्त करना कई कारकों, जैसे सरकार की नीतियों की प्रभावशीलता और माओवादी समूहों की अनुकूलन क्षमता, पर निर्भर करेगा.

अनपेक्षित विवरण के रूप में, माओवादियों ने हाल के वर्षों में कुछ क्षेत्रों में अपनी गतिविधियां कम की हैं, लेकिन कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक वंचना और सामाजिक असमानता जैसे मूल कारणों को संबोधित किए बिना इसे पूरी तरह समाप्त करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है.

विस्तृत सर्वेक्षण नोट: भारत में माओवाद की समझ और इसके उन्मूलन की संभावना

परिचय

यह नोट भारत में माओवाद की परिभाषा, इसके खिलाफ लड़ाई, और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा मार्च 2026 तक इसे समाप्त करने के लक्ष्य की जांच करता है. यह खोज विभिन्न स्रोतों, जैसे शैक्षिक लेख, समाचार रिपोर्ट, और ऑनलाइन चर्चाओं, पर आधारित है, जो मार्च 17, 2025 तक की जानकारी को दर्शाते हैं.

माओवाद क्या है ?

माओवाद भारत में नक्सली आंदोलन के रूप में जाना जाता है, जो माओ त्से-तुंग की विचारधारा से प्रेरित है, जो चीन में कम्युनिस्ट क्रांति के पीछे थे. यह आंदोलन 1967 में पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी क्षेत्र में किसान विद्रोह से शुरू हुआ और बाद में पूरे देश, विशेष रूप से मध्य और पूर्वी भारत के ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में फैल गया. ([Naxalite–Maoist insurgency – Wikipedia]). माओवादियों का मानना है कि भारतीय सरकार फिजूल और सामंती है, और वे इसे उखाड़ फेंकने के लिए सशस्त्र संघर्ष और ‘लोकयुद्ध’ की रणनीति अपनाते हैं.

माओवादी, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओवादी) (CPI-Maoist) इस आंदोलन का मुख्य संगठन है, जो 2004 में विभिन्न नक्सली समूहों के विलय से बना ([Communist Party of India (Maoist) – Wikipedia]). उनकी विचारधारा में वैश्वीकरण को बाजार मूलतत्ववादियों द्वारा लोगों पर युद्ध और जाति प्रणाली को सामाजिक उत्पीड़न के रूप में निंदा करना शामिल है. उनका अंतिम उद्देश्य नई लोकतांत्रिक क्रांति के माध्यम से ‘लोगों की सरकार’ स्थापित करना है.

माओवादी किससे और क्यों लड़ता है ?

माओवाद भारतीय सरकार, जमींदारों, और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के खिलाफ लड़ता है, क्योंकि वे मानते हैं कि ये संस्थाएं सामाजिक और आर्थिक असमानता को बढ़ावा देती हैं. विशेष रूप से, वे आदिवासी समुदायों के अधिकारों की रक्षा के लिए लड़ते हैं, जो वे मानते हैं कि निजी निगमों और राजनीतिक वर्ग द्वारा शोषित हैं ([Why Maoism is still alive in India | The Daily Star]).

माओवादियों का मानना है कि वर्तमान प्रणाली किसानों और आदिवासियों को उनके अधिकारों से वंचित करती है, और वे इसे बदलने के लिए सशस्त्र संघर्ष का सहारा लेते हैं. उनकी रणनीति में लंबे समय तक चलने वाले सशस्त्र संघर्ष और ग्रामीण क्षेत्रों में गुरिल्ला युद्ध शामिल है, जो माओ त्से-तुंग द्वारा चीनी कम्युनिस्ट क्रांति के दौरान विकसित की गई थी ([Maoist Movements in India: Issues and Challenges – social movement]).

आर्थिक वंचना और ऐतिहासिक जाति-आधारित भेदभाव माओवाद को इन क्षेत्रों में अपील बनाए रखने के मुख्य कारण हैं. शोधकर्ताओं ने पाया है कि आदिवासी समुदाय, जो राष्ट्रीय जनसंख्या का लगभग 9% हैं, गैर-आदिवासी गरीब आबादी की तुलना में भी अधिक गरीब हैं ([Why Maoism is still alive in India | The Daily Star]).

वर्तमान स्थिति और सरकार की रणनीति

हाल के वर्षों में, माओवादी हिंसा और प्रभावित जिलों की संख्या में कमी आई है. गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2009 से 2021 के बीच माओवादी हिंसा की घटनाएं 77% कम हुई हैं, और मृतकों की संख्या 1,005 से 147 हो गई है ([Why has Maoist violence subsided in India?]). प्रभावित जिलों की संख्या भी 96 से घटकर लगभग 46 हो गई है, जो सरकार की रणनीति की सफलता को दर्शाता है.

सरकार की रणनीति में सुरक्षा-संबंधी उपाय, विकास हस्तक्षेप, और स्थानीय समुदायों के अधिकारों और सुविधाओं को सुनिश्चित करना शामिल है. विशेष रूप से, छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में ‘ऑपरेशन प्रहार’ जैसे अभियान माओवादी कैडरों को खत्म करने और आत्मसमर्पण को प्रोत्साहित करने में सफल रहे हैं ([Ram Madhav writes: How Modi government tackled Maoism in India | The Indian Express]).

अमित शाह का लक्ष्य: मार्च 2026 तक माओवाद को समाप्त करना

अमित शाह ने कई अवसरों पर मार्च 31, 2026 तक माओवाद को समाप्त करने का लक्ष्य रखा है. उदाहरण के लिए, फरवरी 2025 में, छत्तीसगढ़ में सुरक्षा बलों द्वारा 31 माओवादियों को मारने के बाद, शाह ने फिर से इस लक्ष्य को दोहराया ([Amit Shah vows to eradicate Maoism by March 31, 2026 – The Hindu]). उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, सरकार इस चुनौती को समाप्त करने के लिए एक मजबूत और निर्दय रणनीति अपना रही है.

इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, सरकार माओवादियों को आत्मसमर्पण के लिए प्रोत्साहित करने की नीतियां भी ला रही है, जैसे छत्तीसगढ़ में एक नई ‘आत्मसमर्पण नीति’ ([End Of The Line For Maoism By March 2026? Amit Shah Sets Big Target]). हाल के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में 287 माओवादियों को खत्म किया गया, 1,000 गिरफ्तार किए गए, और 837 ने आत्मसमर्पण किया, जो सरकार की रणनीति की प्रभावशीलता को दर्शाता है ([Centre, Chhattisgarh committed to eradicating Maoism by 2026: Amit Shah | Latest News India – Hindustan Times]).

चुनौतियां और आलोचनाएं

हालांकि, माओवाद को पूरी तरह समाप्त करना चुनौतीपूर्ण है. कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक वंचना और सामाजिक असमानता जैसे मूल कारणों को संबोधित किए बिना इसे समाप्त करना मुश्किल है ([Maoist Movements in India: Issues and Challenges – social movement]). इसके अलावा, माओवादियों का आधार ग्रामीण और वन क्षेत्रों में है, जहां सरकार की पहुंच सीमित है, और वे गुरिल्ला युद्ध की रणनीति का उपयोग करते हैं, जो उन्हें पकड़ना मुश्किल बनाता है.

सिविल सोसाइटी संगठनों ने शिकायत की है कि माओवादियों के खिलाफ अभियान के दौरान शांतिपूर्ण कार्यकर्ताओं और आदिवासियों के खिलाफ दमन भी हुआ है, जो माओवादियों को और समर्थन दे सकता है ([Maoist setback: On the anti-Naxalite operations this year – The Hindu]).

तुलनात्मक विश्लेषण: प्रगति और लक्ष्य

हाल के वर्षों में माओवादी हिंसा में कमी आई है, लेकिन इसे पूरी तरह समाप्त करना अभी भी एक चुनौती है. निम्नलिखित तालिका माओवाद की वर्तमान स्थिति और सरकार की प्रगति को दर्शाती है –

| **वर्ष** | **प्रभावित जिले** | **हिंसा की घटनाएं** | **मृतक (नागरिक + सुरक्षा बल)** |
|———-|——————-|———————|——————————-|
| 2010 | 96 | 2,258 | 1,005 |
| 2019 | 61 | – | 202 |
| 2021 | 46 | 509 | 147 |
| 2025 (अनुमानित) | ~38-46 | – | <100 |

(स्रोत: [Why has Maoist violence subsided in India?])

यह तालिका दर्शाती है कि माओवादी हिंसा और प्रभावित क्षेत्रों में लगातार कमी आई है, जो सरकार की रणनीति की सफलता को दर्शाता है.

निष्कर्ष

अंत में, माओवाद भारत में एक गंभीर आंतरिक सुरक्षा चुनौती है, लेकिन सरकार ने हाल के वर्षों में इसे कम करने में महत्वपूर्ण प्रगति की है. अमित शाह ने मार्च 2026 तक इसे समाप्त करने का लक्ष्य रखा है, और वर्तमान रुझानों के आधार पर, यह संभव प्रतीत होता है. हालांकि, चुनौतियां बनी हुई हैं, और इस लक्ष्य को प्राप्त करना कई कारकों पर निर्भर करेगा.

संदर्भ

  1. [Communist Party of India (Maoist) – Wikipedia](https://en.wikipedia.org/wiki/Communist_Party_of_India_%28Maoist%29)
  2. [Naxalite–Maoist insurgency – Wikipedia](https://en.wikipedia.org/wiki/Naxalite%E2%80%93Maoist_insurgency)
  3. [Why has Maoist violence subsided in India? – DW](https://www.dw.com/en/why-has-maoist-violence-subsided-in-india/a-64292819)
  4. [Why Maoism is still alive in India | The Daily Star](https://www.thedailystar.net/opinion/views/news/how-maoism-still-alive-india-3590056)
  5. [Maoist Movements in India: Issues and Challenges – social movement](https://ebooks.inflibnet.ac.in/soc14/chapter/maoist-movements-in-india-issues-and-challenges/)
  6. [Ram Madhav writes: How Modi government tackled Maoism in India | The Indian Express](https://indianexpress.com/article/opinion/columns/ram-madhav-writes-how-modi-govt-tackled-maoism-in-india-9554358/)
  7. [Amit Shah vows to eradicate Maoism by March 31, 2026 – The Hindu](https://www.thehindu.com/news/national/no-indian-citizen-will-lose-life-after-end-of-naxalism-by-march-31-2026-amit-shah/article69199051.ece)
  8. [End Of The Line For Maoism By March 2026? Amit Shah Sets Big Target – NDTV](https://www.ndtv.com/india-news/end-of-the-line-for-maoism-by-march-2026-amit-shah-sets-big-target-6409799)
  9. [Centre, Chhattisgarh committed to eradicating Maoism by 2026: Amit Shah | Latest News India – Hindustan Times](https://www.hindustantimes.com/india-news/centre-chhattisgarh-committed-to-eradicating-maoism-by-2026-amit-shah-101734262638304.html)
  10. [Maoist setback: On the anti-Naxalite operations this year – The Hindu](https://www.thehindu.com/opinion/editorial/%E2%80%8Bmaoist-setback-on-the-anti-naxalite-operations-this-year/article68609915.ece)

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