Home कविताएं सुब्रतो चटर्जी की दो कविताएं

सुब्रतो चटर्जी की दो कविताएं

0 second read
0
0
366

हर रोज़
समंदर की तरफ़
खुलती है
एक हत्यारी खिड़की
और वो लड़की
अपनी तर्जनी के
पोर में समेटकर
एक चुटकी अमावस
खींच लेती है दो रेखाएं

उसे यक़ीन है
दुनिया के मटमैले मानचित्र को
देखने में मददगार है
अमावस का टुकड़ा

हत्यारी खिड़की
बहा ले जाती है उसे
उसके खुले बाल
बर्फीली आंधी में बची
उष्मा की तरह
चिढ़ाती है मृत्यु को

इसी तरह
जब जब थम जाती हैं हवाएं
गुमसुम समंदर की छाती पर
उभर आता है
एक पुराना रोमांटिक गाना
किसी भटके हुए जहाज़ की तरह

अमावस की दो लकीरें
खींच जाती हैं
षोडशी के थर्राते गालों पर

लड़की
कोई जतन नहीं करती
कलुष धोने का

उसके हाथ
भरे हुए हैं
फूलों के गुच्छों से
जिन्हें अभी अभी चढ़ाना है उसे
एक परित्यक्त कब्र पर
जो लेटा है चुपचाप
हत्यारी खिड़की के बाहर

स्मृतियां

स्मृतियां पारस हैं
माज़ी के कबाड़ में
भूले हुए लोहा लक्कड़ को छू कर
प्राण डाल देतीं हैं उन में

दुर्गा की खोयी हुई कानों की बालियों का मिलना
अपु को देते हैं उसके
नये संसार की आधारशिला

बिछुड़े हुए लोगों की बदरंग तस्वीरों में
क़ैद हैं मेरे जीवन के सबसे ज़्यादा सुनहरे दिन

अचानक
अंधेरे में टटोलते हुए
पाँव से टकरा जाती है
एक पुरानी, जंग लगी
लोहे की ज़ंजीर
जो कभी काम आता था
मेरे उद्दंड बुल डॉग को क़ाबू में करने के लिए

फंदा आज भी अक्षुण्ण है
लेकिन, उसके बीच से कब का
फिसल कर बहुत दूर चला गया है
मेरा कुत्ता
मुस्कुराते हुए सोचता हूं मैं

इस कबाड़ के ढेर में
हरेक चीज़
मेरे प्रिय लोगों को
अपना बनाये रखने की
मेरी नाकाम कोशिशों की गवाही है

स्मृतियां पारस हैं
अब मेरे पास
सोने का वर्क चढ़ा हुआ एक काला संसार है
काले सागर पर बिखरे हुए
सुबह की सुनहरी किरणों की तरह

Load More Related Articles
Load More By ROHIT SHARMA
Load More In कविताएं

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also

‘Coup pour Coup’ (Blow for Blow) : फ्रांस के टेक्सटाइल महिला मजदूरों की कहानी

‘Coup pour Coup’ (Blow for Blow). यह फिल्म फ्रांस के टेक्सटाइल महिला मजदूरों की कहानी है. …