Home कविताएं जो रास्ता चलने का है

जो रास्ता चलने का है

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जो रास्ता चलने का है
उस पर न यादव जी चलते हैं
न गुप्ता जी
शर्मा जी की तो बात ही अलग है
और चौधरी जी की अपनी खाप पंचायत है

दुग्ध धवल बल्ब की रौशनी में
अब आप अपनी नाक के
नकबेसर से बेफ़िक्र हो सकते हैं
कोई कौआ ले भागने की हिम्मत नहीं करेगा

काला चश्मा आप पर खूब फबता है
गुप्त योजना अब आप की पूरी तरह लीकप्रूफ है

संतों के हेट स्पीच कोई नई परिघटना नहीं है
तब कान में पिघले शीशे का डर ज़्यादा था
आश्रम की तस्वीर तब आश्रम तक रहती थी
बाहर वायरल नहीं होती थी
तब निशाने पे कोई और था
और अब निशाने की जद में कई एक और आ गये हैं

मुझे दुःख है तो बस
जंगल में सिंहों के लगातार घटती संख्या पर

बाक़ियों को इस तंग गली
चलने की कोई मनाही नहीं है
निर्विघ्न पैदल चल सकते हैं

हमारे स्वर्णिम काल में
आज के राइट ब्रदर्स के पहले भी
आसमान में स्वर्ण रथ उड़ा करते थे
सोमपायी इंद्र का आकाश मार्ग भ्रमण
किसे याद नहीं है

पता नहीं साइंस एवं
विश्व इतिहास कॉंग्रेस के सम्मेलन में
इस बात की ताकीद क्यों नहीं की जाती है

ऐसे संकल्प सभा में
प्रवचन के अपने तौर तरीक़े हैं
जो साइंस कांग्रेस के मुतल्लक
राष्ट्रीय स्तर पर ज़्यादा लाभप्रद हैं

  • राम प्रसाद यादव

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