Home कविताएं शाम फिर से सुर्खियों में है

शाम फिर से सुर्खियों में है

0 second read
0
0
439

इस बार
शाम फिर से सुर्खियों में है
और जब जब शाम
सुर्ख़ियों में होती है
पिचके हुए गुब्बारों से पट जाता है
खेल का मैदान

एक विशाल परित्यक्त वेश्यालय की
बदरंग दीवार पर पीठ टिकाकर
अंतिम सांसे गिनता है समय
कुछ सरीसृप बेलौस चढ़ते हैं
सर कटे पेड़ों पर
और गह्वर में फुफकारते हैं विषधर

जानता हूं
शाम का यह दृश्य
सहसा हज़म नहीं होता
लेकिन दुपाए से चौपाए बनने की प्रक्रिया भी
आसान नहीं होती

नीले ब्रह्मांड की रोशनी में
छुप जाती है
पश्चात पसरण की असह्य पीड़ा उकेरता
आदमी का चेहरा
नदी में बहती अधजली अस्थियां
मछलियों का भोजन भी नहीं बनते

तुम चाहो तो बहा कर ले आओ शाम
सुर रिक्त स्वर में
परिंदे फिर भी नहीं लौटेंगे
सर कटे पेड़ों पर साथी

  • सुब्रतो चटर्जी

प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें]

Load More Related Articles
Load More By ROHIT SHARMA
Load More In कविताएं

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also

‘Coup pour Coup’ (Blow for Blow) : फ्रांस के टेक्सटाइल महिला मजदूरों की कहानी

‘Coup pour Coup’ (Blow for Blow). यह फिल्म फ्रांस के टेक्सटाइल महिला मजदूरों की कहानी है. …