
यहां पूजे जाते हैं लिंग
और..
योनियों में ठूंस दी जाती है
मोमबत्तियां…
प्लास्टिक की बोतले
कंकड़ पत्थर
लोहे की सलाखें तलक….
चीर दिया जाता है गर्भ
कर दी जाती है बोटी-बोटी
अजन्मे भ्रूण की
और भालो पर उछाला जाता है
दूधमुंहा नवजात
दौड़ाया जाता है जिस्म कर नंगा सरेबाजार
बता डायन खींच ली जाती है सलवार
और बना देवदासी भोगा जाता है बार बार
और आप…
मुझे भाषा की शीलता अश्लीलता
सिखाये जाने को मरे जा रहे हैं !!
मर्यादा के नाम पर.
सच को ढके रखने की यह
सांस्कृतिक विरासत रखे अपने पास…
विद्रोह मर्यादा में बने रहना नहीं मुझे..
मर्यादाये तोड़ देना है…!!!
- कमल दीक्षा
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