Home कविताएं हमारी जमीन ही नहीं हमारा…

हमारी जमीन ही नहीं हमारा…

0 second read
0
5
302

इस देश का नाम
उनके पूर्वजों ने रखा भारत
उनके ही किसी पूर्वज के नाम पर
जिसे मै भी जानता हूं

पता नहीं मेरे पूर्वजों ने
इस देश का क्या नाम रखा था ?
जिसे मैं नहीं जानता हूं

ऐसा तो हो ही नहीं सकता कि
मेरे पूर्वजों ने इस देश को
कोई नाम न दिया हो
वे इस जमीन पर सबसे पहले आए थे
इसलिए इसका नामकरण भी सबसे पहले
मेरे पुरखों ने ही किया होगा
ऐसा मैं मानता हूं

जिस तरह आज भी हम अपनी भाषा में
पुकारते हैं किसी नदी या पेड़ को उसके नाम से
वैसे ही तो पुकारते रहे होंगे
हमारे पुरखे भी
अपने ही किसी पुरखे के नाम पर
इस देश को

हम से हमारी जमीन ही नही छिनी गई
हमारा नाम और पहचान भी छिना गया
और धकेल दिया गया
राक्षस और दानव कह कर
सभ्यता से दूर पाताल में
ताकी हम दावा न कर सके कि
ये धरती हमारी है

जब भी मेरे पुरखे
स्वर्ग पर दावा करते
तो इंद्र का सिंहासन हिलने लगता
जो उसका कभी था ही नहीं
वह तो हमारी ही जमीन थी
वह तो हमारे ही मेहनत से स्वर्ग बना था

जिसे इंद्र ने ताकत के बल पर
कब्जा कर लिया था
फिर भी हमारे पूर्वजों के नाम से
कांपता था
क्योंकि वह जानता था कि
स्वर्ग उसका नहीं हमारा है
और उसे आज नहीं तो कल
स्वर्ग छोड़ना ही है

जिसे आज का इंद्र भी जानता है
इसलिए वो हम पर ही हमला कर दिया है
ताकी स्वर्ग के असली उत्तराधिकारी को
मिटा सके !

  • विनोद शंकर

प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Load More Related Articles
Load More By ROHIT SHARMA
Load More In कविताएं

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also

‘Coup pour Coup’ (Blow for Blow) : फ्रांस के टेक्सटाइल महिला मजदूरों की कहानी

‘Coup pour Coup’ (Blow for Blow). यह फिल्म फ्रांस के टेक्सटाइल महिला मजदूरों की कहानी है. …