Home लघुकथा ‘मेरी मां क्या सोचेगी इस जीत पर’

‘मेरी मां क्या सोचेगी इस जीत पर’

0 second read
0
0
888

एक दौड़ में केन्या का प्रतिनिधित्व कर रहा एथलीट ‘हाबिल मुताई’ चिन्हों को ठीक से नहीं समझने के कारण, ‘दौड़ पूरी हो गयी’ ये सोच कर फिनिश लाइन से सिर्फ कुछ ही फुट दूरी पे रुक गया.

उसके पीछे आ रहे स्पेनिश एथलीट ‘इवान फर्नांडीज’ ने चिल्लाकर रेस जारी रखने के लिए कहा लेकिन मुताई को स्पेनिश में कहा गया समझ में नहीं आया. इसके बाद स्पेनिश एथलीट ने उसे जीत के लिए धक्का दे दिया.

पत्रकार ने इवान से पूछा – आपने केन्याई को जीत क्यों दिलाया ?’

इवान ने जवाब दिया, ‘मैंने उसे जीत नहीं दिलाई, वह जीतने वाला था.’

पत्रकार ने फिर जोर देकर कहा, ‘लेकिन आप जीत सकते थे !’

इवान ने जवाब दिया, ‘लेकिन मेरी इस जीत से क्या होता ? ऐसी जीत से मिले पदक का सम्मान क्या होगा ? मेरी मां इस बारे में क्या सोचेगी ?’

मूल्य पीढ़ी दर पीढ़ी प्रसारित होते हैं. निर्णय हमारा है कि हम अपने बच्चों को क्या मूल्य सिखा रहे हैं.

  • गोलू वेद

प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…]

Load More Related Articles
Load More By ROHIT SHARMA
  • आग का बीज

    एक छोटे गांव में एक विधवा स्त्री पेलाग्रे रहती थी, जिसका बेटा पावेल मजदूरों की हड़ताल में …
  • सोचेगा सिर्फ राजा…या फिर बागी, सोचना बगावत हुई

    मुखबिर की खबर पर, पुलिस बल थाने से निकला. सशस्त्र जवानों ने जंगल में उजाड़ खंडहर घेर लिया. …
  • आखिर बना क्या है फिर ?

    एक अप्रवासी भारतीय काफी समय बाद भारत वापस लौटता है. एयरपोर्ट पर उतरते ही उसको लेने आये अपन…
Load More In लघुकथा

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also

‘Coup pour Coup’ (Blow for Blow) : फ्रांस के टेक्सटाइल महिला मजदूरों की कहानी

‘Coup pour Coup’ (Blow for Blow). यह फिल्म फ्रांस के टेक्सटाइल महिला मजदूरों की कहानी है. …