Home कविताएं मरो मत, मारो

मरो मत, मारो

0 second read
0
0
536

मरो मत
मारो
तुम्हारा मरना कोई
ख़बर नहीं है अब
क्योंकि वे तुम्हें
पहले से ही
मान चुके हैं
मरा हुआ
इसलिए मारो
भात भात गाते हुए मारो
छीनते हुए मारो
मांगते हुए मत मरो
ख़बरों में रहना चाहते हो तो
ख़बर बनना चाहते हो तो
भात की लड़ाई को
उसके सही अंजाम तक
पहुंचने दो
मरो मत
मारो

  • सुब्रतो चटर्जी

[प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे…]

Load More Related Articles
Load More By ROHIT SHARMA
Load More In कविताएं

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also

‘Coup pour Coup’ (Blow for Blow) : फ्रांस के टेक्सटाइल महिला मजदूरों की कहानी

‘Coup pour Coup’ (Blow for Blow). यह फिल्म फ्रांस के टेक्सटाइल महिला मजदूरों की कहानी है. …