Home कविताएं जिन्दा लोग

जिन्दा लोग

0 second read
0
0
172

आजकल मैं जिन्दा लोगों से ज्यादा
मरे हुए लोगों से बात करता हूं
क्योंकि ज्यादातर जिन्दा लोग तो
उनसे भी ज्यादा मरे हुए हैं
वे मेरे सवालों से भागते नहीं हैं
और नहीं मुझे देख कर मुंह मोड़ते हैं

ये मरे हुए लोग
आपको मिल जायेंगे इतिहास के पन्नो में
साहित्य के किताबों में
जिन्दा लोगों से ज्यादा
ज़िन्दादिली से जीते हुए
अपने समय के सवालों से टकराते हुए
अपने जमाने की बुराईयों से लड़ते हुए

ये आज भी हमें रास्ता दिखाते हैं
निराश हो जाने पर उम्मीद दिलाते हैं
की जीत हमारी ही होंगी
बस हौसला बनाए रखिये

इन्हें बहुत खुशी होती है
जब कोई इनसे बात करता है
धुल जम चुकी किताबों के
पन्नों से इन्हें आजाद करता है
और ले चलता है अपने साथ
संघर्ष के मैदान में
जिसके लिए उन्होंने
अपनी जिन्दगी कुर्बान की थी

ये संघर्ष में साथ नहीं छोड़ते हैं
और नहीं कायरों जैसी बात करते हैं
जब हम किसी सवाल का
जवाब नही दे पाते हैं
वहां ये आगे बढ़ कर जवाब देते हैं
और मुस्कुराते हुए हम से कहते हैं –
टेंशन मत लो साथी
हम है न !

कितना अच्छा लगता है
इनसे बातें करना
इन्हें अपने आस-पास महसूस करना
इन्हें खुद अपने अन्दर जीना
इनके बताएं रास्ते पर चलना
जिसे उन्होंने अपने रक्त से तैयार किया है
और इतिहास के पन्नों पर
अपना नाम दर्ज किया है
जो हमारे जिन्दा होने की सबूत है !

  • विनोद शंकर

प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Load More Related Articles

Check Also

‘Coup pour Coup’ (Blow for Blow) : फ्रांस के टेक्सटाइल महिला मजदूरों की कहानी

‘Coup pour Coup’ (Blow for Blow). यह फिल्म फ्रांस के टेक्सटाइल महिला मजदूरों की कहानी है. …