अवैध

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धरती पर कुछ साम्राज्य थे
जिनका राष्ट्रों पर अवैध कब्जा था.
राष्ट्र लड़ रहे थे साम्राज्यवादियों के खिलाफ.

राष्ट्र में धरती थी हरी-भरी
जंगल, नदी, पहाड़ थे
कुछ कॉर्पोरेट्स का अवैध कब्जा था इन पर
आदिवासी लड़ रहे थे कॉर्पोरेट्स के खिलाफ.

राष्ट्र में उपजाऊ जमीनें थीं
सामंतों का अवैध कब्जा था इन पर.
जमीन जोतने वाले लड़ रहे थे, सामंतों के खिलाफ.

राष्ट्र में कारखाने थे, खदान थे कई
मेहनत पर अवैध कब्ज़ा था पूंजीपतियों का
मजदूर लड़ रहे थे पूंजीपतियों के खिलाफ.

राष्ट्र में धर्म थे कई
एक धर्म का अवैध कब्जा था संस्थानों पर
अल्पसंख्यक लड़ रहे थे, हिंदू फासीवाद के खिलाफ.

राष्ट्र में न्यायपालिकाएं थीं
कानून पर अवैध कब्ज़ा था जिसका.
न्याय लड़ रहा था न्यायपालिका के खिलाफ.

राष्ट्र में परिवार थे
पितृसत्ता का अवैध कब्जा था घरों पर
औरतें बच्चे लड़ रहे थे पितृसत्ता के खिलाफ.

राष्ट्र के इन अवैध कब्जाधारियों की एक अवैध सरकार थी
अवैध सरकार के पास बुलडोजर थे
इसलिए ये सारे अवैध कब्जे वैध थे
अवैध थी जनता,
उसकी लड़ाइयां अवैध थी.

वैधता की इस व्याख्या में
लड़ती जनता ने
अवैध होना अपना नया नागरिक धर्म चुना है
अवैध होना सच्ची नागरिकता है.

यह कविता
लड़ते नागरिकों के
अवैध होने की खुली घोषणा हैं

आओ, अपना बुलडोजर इधर भी लाओ।

  • सीमा आज़ाद

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