Home कविताएं दलित तुम्हारी नाराज़गी की रत्ती भर भी परवाह नहीं करता…

दलित तुम्हारी नाराज़गी की रत्ती भर भी परवाह नहीं करता…

3 second read
0
0
245

ठाकुर इस बात से नाराज़ है कि
दलित आते-जाते
उससे ‘राम-राम’ क्यों नहीं करता ?

पंडित इस बात से नाराज़ है कि
दलित आते-जाते
उसे ‘पांय-लागूं’ क्यों नहीं बोलता ?

बनिया इस बात से नाराज़ है कि
दलित की मां अब पाव भर आटे के लिए,
उसके घर की चक्की क्यों नहीं पीसती ?

जमींदार इस बात से नाराज़ है कि
दलित का बापू अब जूठन के लिए,
भरी दुपहरी उसके खेतों में बेगार नहीं करते ?

पंचायत इस बात से नाराज़ है कि
दलित घोड़े पर बैठकर बारात क्यों गया ?

सरपंच इस बात से नाराज़ है कि
पहले की तरह दलित की बहू आते ही,
उसके हवेली पर क्यों नहीं गई ?

दारोगा इस बात से नाराज़ है कि अब
चाचा उसकी चौकी की सफ़ाई और
उसकी तेल-मालिश क्यों नहीं करते ?

किसी का पढ़ना और आगे बढ़ना
न जाने कितनों को नाराज़ कर देता है
पर ऐसी नाराज़गी से दलित क्यों और कब तक डरें ?

मुझे पता है कि सारे नाराज़ एक साथ
एक चबूतरे पर आ खड़े हुए हैं…
और इन सबके सामने दलित अकेला खड़ा है.

संभव है कि
मार दिया जायेगा या
किसी झूठे मुक़दमे में फंसाकर अंदर कर दिया जायेगा.

पर कुछ वक्त के लिए ही सही,
मरने से पहले कम से कम एक बार ही सही
ज़िंदा होने का सबूत दिया जाये.

दलित तुम्हारी नाराज़गी की
रत्ती भर भी परवाह नहीं करता…
दलित तुमसे, तुम्हारी पंचायत से, तुम्हारी चौकी से,
तुम्हारी गरज़, तुम्हारी गाली, तुम्हारी गोली से,
किसी से रत्ती भर भी नहीं डरता,
क्योंकि दलित अब जाग चुका है.

  • ‘दुर्ज्ञेय’ अजय

प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे…]

ROHIT SHARMA

BLOGGER INDIA ‘प्रतिभा एक डायरी’ का उद्देश्य मेहनतकश लोगों की मौजूदा राजनीतिक ताकतों को आत्मसात करना और उनके हितों के लिए प्रतिबद्ध एक नई ताकत पैदा करना है. यह आपकी अपनी आवाज है, इसलिए इसमें प्रकाशित किसी भी आलेख का उपयोग जनहित हेतु किसी भी भाषा, किसी भी रुप में आंशिक या सम्पूर्ण किया जा सकता है. किसी प्रकार की अनुमति लेने की जरूरत नहीं है.

Load More Related Articles
Load More By ROHIT SHARMA
Load More In कविताएं

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also

‘Coup pour Coup’ (Blow for Blow) : फ्रांस के टेक्सटाइल महिला मजदूरों की कहानी

‘Coup pour Coup’ (Blow for Blow). यह फिल्म फ्रांस के टेक्सटाइल महिला मजदूरों की कहानी है. …