'यदि आप गरीबी, भुखमरी के विरुद्ध आवाज उठाएंगे तो आप अर्बन नक्सल कहे जायेंगे. यदि आप अल्पसंख्यकों के दमन के विरुद्ध बोलेंगे तो आतंकवादी कहे जायेंगे. यदि आप दलित उत्पीड़न, जाति, छुआछूत पर बोलेंगे तो भीमटे कहे जायेंगे. यदि जल, जंगल, जमीन की बात करेंगे तो माओवादी कहे जायेंगे. और यदि आप इनमें से कुछ नहीं कहे जाते हैं तो यकीं मानिये आप एक मुर्दा इंसान हैं.' - आभा शुक्ला
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कविताएं

क्लोन

तुम विगत इतने सालों में जो नहीं कर सके तुम्हारा क्लोन चंद सालों में कर दे रहा है (अच्छा हुआ तुमने समय रहते इनका राज्याभिषेक कर दिया) जूते, कमीज, बैल्ट सब के नाप एक से हैं, और कमरे में टंगे हैं, बस पहन के चल देना है कल की, की हुई उल्टी आज सुबह तक साफ नहीं हुई और अब …

वे कहीं चले गए

जब तुम गहरी नींद में थे वे कहीं चले गए हरेक जाने वाला बुद्ध नहीं बनता कुछ अनिच्छा से जाते हैं या ले जाए जाते हैं बलात् क्योंकि जब तुम सो रहे थे वे गा रहे थे जागने के गीत ये गीत ख़लल डाल रहे थे उनकी नींद में कब्र अकेला रहना चाहता है बहुत हुआ तो अपने आजू बाज़ू …

भारत के नाम पत्र – आयरिश कवि गैब्रिएल रोसेनस्तोक

तेलुगु कवि वरवर राव की कैद पर आयरिश कवि गैब्रिएल रोसेनस्तोक का ‘भारत के नाम पर पत्र.’ भारत ! क्या देवी सरस्वती मुस्कुराएंगी जब कैद करोगे तुम अपने कवियों को ? कोरोना से संक्रमित कर विभ्रमित कवि को जब तुम बिठाओगे पेशाब के दलदल में भारत ! क्या सरस्वती खुश होंगी ? वरवर राव, भेज रहा हूं तुम्हारे लिए ये …

लानत है !

कवि कारा में, और हम बाहर, लानत है ! कविता मूत में लपेट दी गई है, और लाल झंडा झाड़न बना रखा है हमने, लानत है ! कुंद है दरांती, और हथोड़ा हवा में पत्ते सा पतिया रहा, लानत है ! शिकवा शत्रु से नहीं, एक दूसरे की पीठ खुजाते कवि मित्रों से है और हम एंंगेल्स, मार्क्स, लेनिन पर …

लुटेरे हैं … तो युद्ध है !

युद्ध लुटेरे हैं ….तो युद्ध है ! पागलपन नहीं है युद्ध क्या पागलपन में जुटाई जाती हैं सेनाएंं जमा किए जाते हैं असलाह ? बाज़ार है, और बाज़ार पर कब्ज़ा है कब्ज़ा है, और कब्ज़े की मारामारी है मारामारी है … मारामारी की सियासत है सियासत है और सियासत में युद्ध है..! लुटेरे हैं … तो सतत ज़ारी है युद्ध …

तुम तो बहरे हो !

उसे छोड़ दो वो कुछ नहीं कर सकता तुम्हारा वो लड़ नहीं सकता होगा अपने झुर्रियों से भरे हुए कांपते हाथों से बीमारियों से टूट कर इकहरा हो चुका उसका बदन तुम्हें पटक सकने की ताब नहीं रखता होगा उसके कान अब थोड़ा ऊंचा सुनते होंगे लेकिन तुम्हारे अहंकार के बराबर नहीं पाँव लड़खड़ाने लगे होंगे उसकी उम्रदराज़ पदचाप तुम्हारे …

एक कवि की मौत

आज ही मरना था साले को रविवार है कितना कुछ सोचा था अब मुए को ढो कर ले चलो मसान कल शनिवार था घर में कोई नहीं था मौका पाकर साला पी गया बोतल भर और लुढ़क गया कुर्सी पर बैठे बैठे ऐसा क्यों बोलते हो भाई किसी की मौत पर ऐसा नहीं कहते थोड़ा संजीदा दिखो सफेद कपड़े पहनो …

कैसे क्षमा कर कर दूं एकलव्य ?

तुम पर दया नहीं आती क्रोध उपजता है एकलव्य तुम पहचान नहीं पाये कि जिसे तुम गुरु मानकर पूजते रहे वह शिष्यहन्ता है, गुरु नहीं गुर तो उसने तुम्हें दिये नहीं जो भी गुर तुमने सीखे, स्वयं सीखे और जो भी सीखे, उसने छीन लिये तो फिर गुरुदक्षिणा काहे की ? यह सवाल उठा तो होगा तुम्हारे मन में फिर …

लाशें, ईद और रथयात्रा

तुम ईद मनाओ, जगन्नाथ के रथ को हांको बड़े मोलवियों और पुजारियों की बधाई ले लो मैं तुम्हारे बिखेरे रक्त-धब्बों को अपने आंंसुओं से साफ़ करता रहूंगा तुम ईद-निमाज़ पढ़ो, अल्लाह का गुणगान करो जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की जय-जयकार करो पत्थरों में ढलते क्रोध को अपने हाथों से उछालो यह सोचे बिना कि हाथ भी तुम्हारे ही हैं और …

कालांतर में

कालांतर में जब दुनिया के सारे बम बरस चुके होंगे सारे युद्धक विमान नष्ट हो कर धूल चाट रहे होंगे और अकाल मृत्यु के सारे उपादान काल कवलित हो कर तुम्हारी स्मृति में गुंंथ जाएंंगे नथुनों से ग़ायब होते बारूद की महक की तरह कुछ स्त्रियांं फटे हुए बमों के खोखों में उगा लेंगी फूल कुछ मर्द क्यारियांं बनाकर कतारबद्ध …

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