'यदि आप गरीबी, भुखमरी के विरुद्ध आवाज उठाएंगे तो आप अर्बन नक्सल कहे जायेंगे. यदि आप अल्पसंख्यकों के दमन के विरुद्ध बोलेंगे तो आतंकवादी कहे जायेंगे. यदि आप दलित उत्पीड़न, जाति, छुआछूत पर बोलेंगे तो भीमटे कहे जायेंगे. यदि जल, जंगल, जमीन की बात करेंगे तो माओवादी कहे जायेंगे. और यदि आप इनमें से कुछ नहीं कहे जाते हैं तो यकीं मानिये आप एक मुर्दा इंसान हैं.' - आभा शुक्ला
Home कविताएं (page 58)

कविताएं

विकास का आकाश

विकास का आकाश इतना संकीर्ण ! सोचा नहीं था देशभक्ति का रंग इतना दागदार ! सोचा नहीं था पता तो था उस मार्ग के कुमार्ग का शीर्ष का सिंहासन मगर इतना पतित ! इतना गलीज !! सोचा नहीं था उस हाथ से इस हाथ सौंपा था सत्ता मगर यह क्या यह भी रंगा सियार हू ब हू उसी का कलर …

मोदी जी आए हैं …

मां बेटे की सरकार गई मोदी जी आए हैं कतारबद्ध खड़े रहो सब के लिए रोटी लाए हैं लोगों जरा सब्र करो सब के लिए बोटी लाए हैं चिंता की बात नहीं बिहार हो या आंध्र बिसात बिछ गई है सब के लिए गोटी लाए हैं मोदी जी आए हैं … युवाओं, देश आपका ऋणी रहेगा आप ने भरोसा जताया …

स्टेन स्वामी : 83 वर्षीय बूढे ‘देशद्रोही’ को सलाम

यह ऐरा-गैरा 83 वर्षीय बूढ़ा नहीं है मेरी देशभक्त सरकार का कहना है यह भीमा-कोरेगांव का साजिशकर्ता है यह दलितों को बगावत के लिए उकसाता है यह देश की शान्ति के लिए खतरा है यह क्रांति का एक साजिशकर्ता है यह आदिवासियों को भड़काता है इस तरह देश के विकास को बाधित करता है देश के खिलाफ साजिश करता है …

अराजनीतिक बुद्धिजीवी

एक दिन, देश के अराजनीतिक बुद्धिजीवियों से, हमारी भोली-भाली जनता..! करेगी कुछ सवाल..! पूछेगी वह उनसे, क्या किया था उन्होंने..? जब मर रहा था उनका देश..! सांस दर सांस… एक मीठी निपट अकेली, मद्धम आंच की तरह..! नहीं पूछेगा कोई उनसे, कि क्या पहनते थे वह..? या कि कैसे..? एक शाहाना लंच के बाद लेते थे, चैन की लंबी नींद..! …

अंतरराष्ट्रीय साज़िश

एक अंतरराष्ट्रीय साज़िश के तहत उस बच्चे ने कहा था अपनी मांं से मरने से पहले एक रोटी दे दो मांं मुझे बहुत भूख लगी है वह कितनी बड़ी अंतरराष्ट्रीय साज़िश थी जब एक युवक ने कहा मुझे वर्षों से नौकरी नहीं मिल रही है जीने का कोई अर्थ नहीं बचा अब मैं आत्महत्या कर लेना चाहता हूंं वह तो …

एफिल टावर

एफिल टावर शहर के किसी कोने से देखा जा सकता है मैं उसकी बगल में हूं मैं किसी एंगल से दिख नहीं रहा हूं अगल बगल बहुत भीड़ है मैं उन्हें नहीं जानता न वे मुझे जानते हैं मधुमक्खी के इस छत्तानुमा शहर में मै एक मजदूर मधुमक्खी हूं जिसका एक ही काम है ऐय्यास और आराम तलब रानी के …

अगर तुम औरत हो…

अगर तुम कश्मीरी औरत हो तो राष्ट्रभक्ति के लिए हो सकता है तुम्हारा बलात्कार, बलात्कारियों के समर्थन में फहराये जा सकते हैं तिरंगे. अगर तुम मणिपुरी या सात बहनों के देश की बेटी हो तो भी रौंदी जा सकती हो तुम, राष्ट्रभक्ति के लिए तुम्हारी योनि में मारी जा सकती है गोली. अगर तुम आदिवासी औरत हो तो तुम्हारी योनि …

प्रकृति से प्रेम करो ना

प्रकृति से प्रेम करो ना मैं कुछ न करूं तुम्हीं कुछ करो ना इन जीव-जन्तुओं के लिए भी जंगल-जमीन छोड़ों न परिन्दों को भी उन्मुक्त गगन में उड़ने दो ना उन्हें अपने भोजन के लिए न मारो पेट को श्मशान घाट न बनाओ जमीन, जंगल, हवा, धूप, आसमां समान रूप से प्रकृति ने सभी को दिया उनके लिए भी उनका …

द बैटल शिप

द बैटल शिप अपनी अंतिम यात्रा पर शिप ब्रेकिंग यार्ड युद्ध जहाज अपने कुंवारी कैनन सूंघते हैं युद्ध खेल के अलावा कभी भी उपयोग करने के लिए मत रखो फिर भी, यह भारी बूम है दौड़ा नीचे कांपता है दुश्मन की रीढ़ की हड्डी क्या कभी वहां था क्या कभी कोई दुश्मन था समुद्र के एनाल के नीचे घुमावदार क्षितिज …

उठो, अब इस सैलाब की बांहें मरोड़ दो

सब कुछ बिकता है यहां, ये हिंदोस्तां है जनाब ईमान बिकता है, ताज बिकता है, सांसद बिकता है. तुम्हारी इस मासूमियत पर मर न जाऊं कहीं जब खरीदार की कदमपोशी में तुम्हारा सामान बिकता है. किस तवारीख की बात करते हो तुम जनाब तुम्हारा माजी, मुस्तकबिल और आज बिकता है. कहीं रेल, कहीं स्टेशन, कहीं किसान बिकता है गुलामों की …

1...575859...64Page 58 of 64

Advertisement