मंदिर इस मंदिर में अब कोई मोनालिसा नहीं रहती बेघर हुए लोग सांध्य बाती के लिए ढूंंढ लेते हैं सड़क का एक कोना उसी काली जीभ पर ओष्ठागत प्राण हांंफते हुए समय-सा हरिनाम की प्रतीक्षा में वे लोग जो घर नहीं लौटे कभी जिनके इंतज़ार में ज़मींदोज़ हो गए उनके गाँव शहर वे, दुबारा गढ़ने में लगे हैं नए नए …
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