'यदि आप गरीबी, भुखमरी के विरुद्ध आवाज उठाएंगे तो आप अर्बन नक्सल कहे जायेंगे. यदि आप अल्पसंख्यकों के दमन के विरुद्ध बोलेंगे तो आतंकवादी कहे जायेंगे. यदि आप दलित उत्पीड़न, जाति, छुआछूत पर बोलेंगे तो भीमटे कहे जायेंगे. यदि जल, जंगल, जमीन की बात करेंगे तो माओवादी कहे जायेंगे. और यदि आप इनमें से कुछ नहीं कहे जाते हैं तो यकीं मानिये आप एक मुर्दा इंसान हैं.' - आभा शुक्ला
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ख़ूबसूरत कौन- लड़की या लड़का ?

अगर महिलायें गंजी हो जायें, तो बदसूरत लगती हैं… अगर महिलाओं की मुंछें आ जायें, तो बदसूरत लगती हैं… अगर महिलाओं के सिक्स पैक्स एब्स निकल आये, तो खराब लगती हैं… और आप कहते है कि, महिलायें खूबसूरत हैं…??? अब पुरुष की बात करते हैं… यानी लड़कों की… अगर लड़के क्लीन शेव रहें, तो खूबसूरत लगते हैं… और दाढ़ी रखें, …

‘हिन्दू राष्ट्र’ के फासिल्स

कल को जब ‘हिन्दू राष्ट्र’ के फासिल्स तलाशे जाएंगे तो भावी इतिहासकार हैरान रह जाएंगे यह जानकर कि हिन्दू राष्ट्र का निर्माण महिलाओं के नग्न शरीर पर हुआ था फासिल्स में मंदिरों, त्रिशूलों के अवशेष तो मिलेंगे ही बड़ी मात्रा में महिलाओं के नग्न शरीरों के अवशेष भी मिलेंगे निश्चित ही क्षत-विक्षत इतिहासकार हैरान होंगे कि अभी भी उनकी आंखें …

आभाषी अमीरी

गरीबी है कहां गरीबी का मूल्य पांच किलो अनाज मनरेगा किसान योजना में छह हजार रुपए खैरात के लंगर पांच रुपए थाली सरकारी आयोजनों में सामूहिक विवाह गरीबों को यह सब अपनी अमीरी लगती है गरीबी है कहां मंदिर मस्जिद नफरत गाय गोबर तीरथ व्रत त्योहार सांप्रदायिकता कच्ची दारू भांग जुआ सट्टा अखंड भारत का नक्शा यह सब उसे अपनी …

श्वान

चिता की अग्नि से सर्द मौसम में गर्मी ले रहे श्वान को पाप-पुण्य (भला-बुरा) स्वच्छता-गंदगी का कोई ख्याल नहीं रहता उसे सिर्फ स्व जीवन हेतु ठंड में कांपती हड्डियों को सेकना था सत्ता के श्वान भी सिर्फ और सिर्फ अपनी गर्मी बनाए रखने को चिताओं की अग्नि सेक रहे हैं उन्हें पाप-पुण्य (भला-बुरा) स्वच्छता-गंदगी का भान होते हुए भी गर्मी …

सुब्रतो चटर्जी की पांच कविताएं

1. मेरा आना मेरा आना एक बहस का आग़ाज़ था और ये बहस बेमानी नहीं थी मेरे आने से टूट गए कई विंब ज़रख़रीद ग़ुलामों के चिकने चुपड़े चेहरे जो तुम्हारे ज़ेहन में समा कर सदियों से बनाते रहे तुम्हें क्लीव मैं एक नुकीली पहाड़ की चोटी सा उकेरता रहा आसमान की छाती पर नई नई तस्वीरें और गुम भी …

सुब्रतो चटर्जी की दो कविताएं

1. बुझी चिमनी बुझी चिमनी की कालिख़ बंट रही है जिसे लेना है अंजुरी भर ले जाओ इकहत्तर लाशों की एक सौ बयालीस बंद आंखों की कहानी उन करोड़ों खुली आंखों की कहानी से कुछ अलग नहीं है जिनमें मरे हुए सपनों का पिरामिड हज़ारों सालों से सह जाता है सहरा की गर्दो ग़ुबार इस साल मेरी छोटी सी ज़मीन की …

मैं हैरान हूं कि औरत ने … (महादेवी वर्मा की कविता)

मैं हैरान हूं यह सोचकर, किसी औरत ने क्यों नहीं उठाई उंगली ..?? तुलसी दास पर, जिसने कहा, ‘ढोल, गंवार, शूद्र, पशु, नारी, ये सब ताड़न के अधिकारी.’ मैं हैरान हूं, किसी औरत ने क्यों नहीं जलाई ‘मनुस्मृति’ जिसने पहनाई उन्हें गुलामी की बेड़ियां ?? मैं हैरान हूं , किसी औरत ने क्यों नहीं धिक्कारा ..?? उस ‘राम’ को जिसने …

उर्सुला

सुनो उर्सुला हमें जीना ऐसे नहीं ऐसे था! बसाना था अपना एक मकांदो बेतरह! छींट देने थे एक मुट्ठी सितारे अपनी ज़मीन पर जो झरते ताज़े पीले फूल बनकर हमारी मौत पर! जीवन से मौत तलक अपने एकान्त का सफ़र बेशक देता है मजबूती! अकेला भी करता है भरपूर! पर उर्सुला रोज़ रोज़ जी भर कर जीना सीखा तुमसे! प्यार …

अगर आप मुसलमान पैदा हुए…

आप हिन्दू होकर नास्तिक हो सकते हैं वेद ईश्वर गीता का विरोध कर सकते हैं और नास्तिक होकर भी समाज में सर्वाइव कर सकते हैं आप ईसाई होकर बाइबिल यहोवा ट्रिनिटी का इनकार कर सकते हैं कोई आपको बेदखल नहीं करेगा लेकिन अगर आप मुसलमान पैदा हुए हैं तो आपके लिए जिंदगी के मायने आख़िरत की तैयारी से ज्यादा और …

औरतें अक्सर झूठ बोलती हैं…

औरतें अक्सर झूठ बोलती हैं, झूठ बोलकर वे सखियों से मिल आती हैं, बेटी की मार्कशीट खोजने का दिखावा करती हुई, वह एलान करती हैं कि बेटी फर्स्ट पास हुई है, यह झूठ जरूरी है, ताकि बेटी की पढ़ाई जारी रह सके और शादी कुछ दूर खिसक जाय. राशन का हिसाब साफ होने पर भी पति को उधार का हिसाब …

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