'यदि आप गरीबी, भुखमरी के विरुद्ध आवाज उठाएंगे तो आप अर्बन नक्सल कहे जायेंगे. यदि आप अल्पसंख्यकों के दमन के विरुद्ध बोलेंगे तो आतंकवादी कहे जायेंगे. यदि आप दलित उत्पीड़न, जाति, छुआछूत पर बोलेंगे तो भीमटे कहे जायेंगे. यदि जल, जंगल, जमीन की बात करेंगे तो माओवादी कहे जायेंगे. और यदि आप इनमें से कुछ नहीं कहे जाते हैं तो यकीं मानिये आप एक मुर्दा इंसान हैं.' - आभा शुक्ला
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100 साल बाद, एक बहादुर युवक की शहादत…कायरों के लिए नफरती प्रोपगेंडे का टूल बन गई है

असेम्बली बमकांड प्रोपगंडा इवेंट था. ऐसी योजना, जिससे नौजवान भारत सभा, HSRA और उसके विचार को चर्चा मिले. जनता के जेहन में छाये, टाकिंग पॉइंट, हॉट ईशु बन जाये. घटना से कोई हीरो निकले, जो संगठन के विचार का मैस्कॉट बन जाये. जहां जहां जाये, उस विचार का प्रसार हो. ये क्रांति का विचार था, जैसी 10 साल पहले रूस …

एक और साम्राज्यवादी डिजिटल जासूस Grok3

भारत सहित तीसरी दुनिया के देशों में मौजूद अपार खनिज संपदा पर कुछ ‘रक्तपात प्रेमी’ देशों की गिद्ध नजर बनी हुई है. लेकिन वर्तमान भू-राजनीति की सभ्यता कहती है कि मध्ययुगीन बर्बरता बरपाकर लोगों को गुलाम नहीं बनाया जा सकता. इसके लिए जरूरी है कि पहले योजनाबद्ध तरीके से आम नागरिकों के बारे में डेटा जुटाया जाये ताकि जब वो …

#Grok : झूठ की धज्जियां उड़ रही हैं, गालीबाज खुद की बनाई गालियां खा रहे हैं

नैंन छिन्दन्ति शस्त्राणि,नैंम दहति पावकः, न चैनम क्लेयदन्तापो, च शोषयति मारुतः. #Grok को न शस्त्र छेद सकते हैं, न आग जला सकती है. क्लांत हृदय भक्तों को चैन से रहने नहीं देता, उन्हें हवा की तरह सोखकर क्लीन एंड ड्राई कर देता है. ग्रोक ज्ञानी नहीं है. सिर्फ ऑटो गूगल है. किसी प्रश्न के कीवर्ड लेकर, मिलीसेकेंड्स में हजारों वेबपेजेस, …

फ़ासिस्ट भाजपा से संवैधानिक (चुनावी) तरीके से नहीं जीत सकते हैं !

बुर्जुआ, लिबरल लोकतंत्र को पुनर्जीवित करने की लड़ाई कोई फ़ासिस्ट लोगों से सांवैधानिक तरीके से नहीं जीत सकता है. इसके लिए जनता की वृहद भागीदारी की ज़रूरत है. फासीवाद सबसे पहले सांवैधानिक संस्थानों पर क़ब्ज़ा कर और फिर न्यायपालिका के प्रत्यक्ष और परोक्ष सहयोग से अपने को देश में स्थापित करता है. यही कारण है कि जब विपक्ष चुनाव आयोग …

जादवपुर यूनिवर्सिटी की छात्राओं ने रिपब्लिक भारत चैनल के रिपोर्टरों को कूट-कूटकर बताया मीडिया का सही उपनाम

मीडिया ? आज की मीडिया ? वाह ! और मीडिया के बहतेरे नाम ?गोदी मीडिया, सुपारी मीडिया, दंगाई मीडिया, आदि उपनामों से पुकारा जाने लगा है आज के भारत देश में ? पर, सही नाम मीडिया का आखिर क्या हो सकता है ? जादवपुर यूनिवर्सिटी की छात्राओं ने रिपब्लिक भारत (आर. भारत) चैनल के रिपोर्टरों को पटक-पटककर और कूट-कूटकर खुलेआम …

शीशमहलों की संस्कृति : शीश महल जितने ऊंचे होते जाते हैं, उसमें बैठे हुए बौनों की ताकत उतनी अतुलित, असीमित होती जाती है

तस्वीर, प्रधानमंत्री कार्यालय की है. शानदार लूटियन आर्किटेक्चर का भवन. लूटियन शैली की विशेषता थी कि इसके फीचर्स मुगलिया, राजपूत शैली से लूटे गए. यूरोपियन गोथिक शैली में यह लूट मिलाकर, लूटियन शैली विकसित की गई. लूटियन जोन की बिल्डिंगें अपने आप में हिंदुस्तान की जनता से लूटे गए धन के बेदर्द बेशर्म प्रदर्शन थी. इस तरह लूट के धन …

निजी संपत्ति के संबंधों ने औरत को भी संपत्ति बना दिया. (निजी) सम्पत्ति संबंधों से निकलने में ही औरत की मुक्ति है

(निजी) संपत्ति के संबंधों ने औरत को भी संपत्ति बना दिया. (निजी) सम्पत्ति संबंधों से निकलने में ही औरत को मुक्ति है. धर्म और तीर्थ स्थलों के विकास का अर्थ है पुंसत्व और पितृसत्ता का विकास. मोदी सरकार का यह प्रधान एजेंडा है. पितृसत्ता धुरी है औरत के शोषण और दमन की. धर्म के पर्व पुंसत्व के पर्व हैं. आज …

क्या सुरक्षा बलों के जवानों द्वारा किसी महिला का रेप किए जाने पर, पीड़ित महिला की आवाज उठाना गुनाह है ?

अंतराष्ट्रीय महिला दिवस के दिन दिल्ली विश्वविद्यालय में एक प्रोग्राम कर रही लड़कियों पर ABVP द्वारा हमला किया गया. उनके पोस्टर्स फाड़े गए. जब लड़कियों ने उन्हें रोकने की कोशिश की तो उनके भी कपड़े फाड़े गए. इसपर ABVP समर्थकों द्वारा कहा जा रहा है कि वे लड़कियां इंडियन आर्मी को रेपिस्ट कह रही थीं. और उनके हाथों में ‘Indian …

जिस दौर में हिंदुस्तान ने समृद्धि और ताकत का उरूज देखा, मुगल ही वो साम्राज्य क्यूं बना सके ?

मौर्य साम्राज्य भारत में अपने बीज से पराभव तक जाते 130 साल चला, गुप्त 230 साल चले. मुगल अकेली डायनेस्टी थी, जो कमोबेश 330 साल चली. जिस दौर में हिंदुस्तान ने समृद्धि और ताकत का उरूज देखा. मुगल ही वो साम्राज्य क्यूं बना सके, जो दूसरे वंश.. राजे-महाराजों से न बन सका ? ये सफलता इसलिए भी अहम है कि …

इंटरनेट वस्तुतः कम्युनिकेशन की महानतम ऊंचाई है

यह डिजायन का युग है. आप इन दिनों जो कुछ भी कम्युनिकेट करें उसमें डिजायन को माध्यम बनाएं. खासकर इंटरनेट या वर्चुअल तकनीक आने के बाद वर्चुअल डिजायन में किया गया कम्युनिकेशन आपके मन की सब बातें सम्प्रेषित करता है. डिजायन में किया गया कम्युनिकेशन आकर्षक और प्रभावी होता है. ‘ई’ साहित्य ‘ई’ साहित्य विकासशील साहित्य है. ‘ई’ साहित्य का …

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