सोशल मीडिया पर अन्ना हजारे की जम कर उड़ी खिल्ली

भारत में चुनाव की यह प्रक्रिया भी अन्य चीजों की तरह अंग्रेजी हुकूमत की ही देन है. इस तथाकथित लोकतांत्रिक प्रणाली में चुनाव केवल जनता को धोखा देने के लिए प्रचलित किया गया था, जिसका वास्तविक जन-आकांक्षा से कोई लेना-देना नहीं था.यही कारण है कि आम आदमी के लिए इस चुनाव का कोई मायने-मतलब नहीं था और वोट देने हेतु …
सुकमा में सी.आर.पी.एफ. के 26 जवानों की हत्या पर राज्य और केन्द्र सरकारें बगले झांक रही है और उसके जरखरीद चमचे मीडिया और सोशल मीडिया में सी.आर.पी.एफ. के जवानों को ‘‘निरीह’’, ‘‘गरीब’’ और केवल ‘‘ड्यूटी पूरा करने वाला’’ बता कर माओवादियों से न मारने की अपील कर रही है. आश्चर्य तो तब होता है जब यही ‘‘निरीह’’, ‘‘गरीब’’ और केवल …
बी.एस.एफ. के जवान तेजबहादुर यादव की अधिकारियों के द्वारा खाने में भ्रष्टाचार की गंभीर सप्रमाण शिकायत करने के बाद जिस प्रकार उसे बर्खास्त कर दिया गया, इसमें भ्रष्टाचार में संलिप्त पूरी सरकारी मशीनरी और खुद भारत सरकार के भी शामिल होने का पुख्ता प्रमाण है. वहीं एक दूसरे जवान की संदेहास्पद हत्या केवल इसलिए कर दी गई कि उसने सेना …
भ्रष्टाचार और दलाली की पराकाष्ठा को कब का पार कर चुकी शासक वर्गीय पार्टियां अपने कंधों पर राजनीति की अर्थी को उठाये आज दिल्ली के आम आदमी के दरवाजे पर दस्तक दे रहा है. शासकीय राजनीति पार्टी का सबसे बदबूदार चेहरा बन चुकी भारतीय जनता पार्टी एम0सी0डी0 को आगे कर दिल्ली को कूड़े के ढ़ेर पर बिठा रखा है और …
…और उसे बी.एस.एफ. की नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया. बी0एस0एफ0 के जवान तेज बहादुर यादव को खाने में शिकायत करने के कारण काफी प्रताड़ना मिली. उसने स्वैच्छिक सेवावकाश की सिफारिश की, जिसे उच्चाधिकारी ने नकार दिया और अब उसे नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया. गनिमत है उसकी हत्या उन दूसरे सैनिक की तरह नहीं हुई जिन्होंने बेगारी प्रथा …
भारत के चुनावी इतिहास में अब तक का सबसे सनसनीखेज चुनाव अगर कोई है तो वह दिल्ली के एम0सी0डी0 जैसे छोटे निकायों का चुनाव. इस चुनाव पर राष्ट्रीय और अन्तराष्ट्रीय स्तर पर लोगों की निगाहें अगर जमी है तो इसका एकमात्र कारण आम आदमी पार्टी जैसे ईमानदार खेमे की मौजूदगी और अपनी चड्डी तक को सरे बाजार नीलाम करता चुनाव …
नक्सलवादियों ने डंके के चोट पर 1967 ई0 को घोषणा किया था कि भारत में चुनाव केवल मसखरों का खेल है, इसलिए इसका बहिष्कार करना चाहिए. नक्सलवादियों के इस घोषणा के साथ ही एक तरफ देश के तमाम शासक वर्ग जहां एकबारगी थर्रा उठा था वही देश की विशाल आबादी जागरूक भी हो गयी और हथियार उठा ली. इसका परिणाम …
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