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आवारा बच्चे शिकायत नहीं करते

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आवारा लड़के
आवारा लड़कियों के पीछा करते हैं
आवारा लड़के लड़कियां
नामुराद होकर
दफ़्तरों के चक्कर लगाते हैं
नौकरी की तलाश में
जो नहीं है
ठीक उसी तरह
जैसे हम पूजाघरों के चक्कर लगाते हैं
उस ईश्वर की तलाश में
जो नहीं है

आवारा लड़के
और आवारा लड़कियां
ढूंढ लेते हैं एक दूसरे को
दिन के अंत मेंं
ठीक उसी तरह
जैसे वृद्धाश्रम में
कयी जोड़ी सूनी आंखें
ढूंढ लेती हैं तकने को
सूना छत

दिन के अंत के बाद
देर रात
जब घर लौटते हैं
आवारा लड़के और लड़कियां
सबकुछ समझ जाती हैं उनकी माएं
चेहरा देखकर
और चुपचाप परोस देतीं हैं
रोटी और दाल
आवारा बच्चे शिकायत नहीं करते.

  • सुब्रतो चटर्जी

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ROHIT SHARMA

BLOGGER INDIA ‘प्रतिभा एक डायरी’ का उद्देश्य मेहनतकश लोगों की मौजूदा राजनीतिक ताकतों को आत्मसात करना और उनके हितों के लिए प्रतिबद्ध एक नई ताकत पैदा करना है. यह आपकी अपनी आवाज है, इसलिए इसमें प्रकाशित किसी भी आलेख का उपयोग जनहित हेतु किसी भी भाषा, किसी भी रुप में आंशिक या सम्पूर्ण किया जा सकता है. किसी प्रकार की अनुमति लेने की जरूरत नहीं है.

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