Home ब्लॉग अफीम के नशे से भी ज्यादा मदहोश करने वाली नशा है धर्म

अफीम के नशे से भी ज्यादा मदहोश करने वाली नशा है धर्म

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कहा जाता है झूठ के पांव नहीं होते और सच के पंख नहीं होते. कुछ ऐसी ही हालत वर्तमान में इस देश के शासकों की हो गई है. दरिन्दगी और झूठ के सहारे शासन कर रहे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उसके भक्त जब यह ऐलान करते हैं कि देश की दुर्दशा का जिम्मेवार पिछले 60 साल – पहले 70 साल की बात करते थे, पर बाद में पता लगा कि इस देश को आजाद हुए ही 70 साल हुए हैं, जिसमें 8 साल का शासनकाल स्वयं भाजपा का भी था. तब उन्हें थोड़ी लज्जा की अनुभूति हुई और फिर इसे सुधार कर शासनकाल की अवधि को घटा कर 60 साल कर दिया – तक शासन करने वाली कांग्रेस जिम्मेवार है, तो देश एकबारगी सोचने को मजबूर हो जाता है कि क्या वाकई तथाकथित आजादी के बाद के 60 साल तक देश पर राज करने वाली कांग्रेस देश को बर्बाद कर गई ? क्या देश में जो भी विकास नजर आता है वह केवल नरेन्द्र मोदी के महज 3 साल के शासन अवधि की देन है ? भक्तों का वश चले तो उसे यह ऐलान करने में भी गुरेज न होगा कि शायद पृथ्वी का अस्तित्व ही नरेन्द्र मोदी के कारण हुई है. कि नरेन्द्र मोदी के पहले यहां किसी भी चीज का अस्तित्व ही न था – ज्ञान, विज्ञान, ग्रह, नक्षत्र, सौर मंडल, यहां तक कि खुद ब्रह्मांड का भी नहीं.

यह एक बनावटी पर प्रतिकात्मक तस्वीर है

ऐसे में एक बार पीछे पलट कर कांग्रेस के 60 साल के शासनकाल की तुलना मोदी के 3 साल के शासनकाल से करना जरूरी हो जाता है. यह तुलना करते हुए एक बात पहले ही स्पष्ट कर देना जरूरी है कि कांग्रेस और उसके प्रधानमंत्री ही वह पार्टी है जो देश के हर विकास और पतन के लिए भी जिम्मेवार है. इसके साथ ही कांग्रेस ही वह पार्टी भी है जो देश की आजादी की लड़ाई में अपना योगदान दिया था और क्रांतिकारी आन्दोलन को भी जन्म दिया था, भले ही बाद में वह अलग हो गई हो. इसके उलट भारतीय जनता पार्टी की मातृ संगठन आर.एस.एस. न केवल आजादी की लड़ाई से भाग खड़ा हुआ था बल्कि आजादी का यथासंभव विरोध भी किया था और देश के महान क्रांतिकारियों की हत्या करने के षड्यंत्र में भी भागीदार हुआ था.

1947 ई. की तथाकथित आजादी का वक्त वह दौर था जब अंग्रेजों ने 200 साल तक देश में भारी लूट-खसोट मचा कर देश की अर्थव्यवस्था को जर्जर कर दिया था. पूरे देश में अराजकता का जलजला आ गया था. भारत विभाजन और उसके बाद होने वाले भयानक दंगों ने रही-सही कसर को पूरा कर दिया था. सारा देश ही राजा-रजवाड़ों के अन्तर्कलह से विभाजित था. देश भर के मात्र 50 गांवों में बिजली थी. किसी भी गांवों में नल नहीं था. पीने के पानी का एक मात्र माध्यम कुंआ था, जो जातिवाद के कलंक से शापित था. पूरे देश में मात्र 10 बांध थे. सीमाओं पर महज चार विमान और बीस टैंक के सहारे कुछेक ही सैनिक तैनात थे. देश की सीमायें चारों तरफ से खुली हुई थी. ऐसी ही खाली खजाने के साथ अंग्रेज देश को कांग्रेस के हाथों में सौंप गये थे, जिसे हम आजादी के नाम से जानते हैं.

कांग्रेस के विकास और पतन के इन 60 सालों में कांग्रेस ने देश के साथ गद्दारी करने वाली भारतीय जनता पार्टी के हाथों में जिस देश की बागडोर सौंपी थी, उस वक्त तक देश की हालत का ब्यौरा इस प्रकार दिया जा सकता है. कांग्रेस ने इन 60 सालों में विश्व की सबसे बड़ी सैन्य ताकत के तौर पर देश की पहचान सुनिश्चत की. हजारों की संख्या में विमान, टैंक और लाखों फैक्ट्रियां, लाखों गांवों में बिजली सेवा के साथ-साथ हजारों की तादाद में बांध बनाया. देश भर में लाखों किलोमीटर लंबी सड़कों और रेल लाईनों का निर्माण कर देश को परमाणु बम जैसे घातक हथियार से सुसज्जित कर देश को ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जैसे महान वैज्ञानिक से परिचय कराया, जिनका बाद में भाजपा ने उनके सम्मान का अपने हित में उपयोग कर देश का राष्ट्रपति बना दिया. फोन जो महज 10-20 राजघरानों की अमानत हुआ करती थी, को देश की जनता के हर हाथों में थमा दिया और मोटरसाईकिल जैसे वाहनों से हर घर को सज्जित कर दिया.

देश के सर्वाधिक लोकप्रिय व ईमानदार प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री

इन 60 सालों में कांग्रेस ने देश को कई प्रधानमंत्री दिये हैं जिसमें नेहरू, शास्त्री, इंदिरा जैसे नाम लिये जा सकते हैं जिन्होंने विश्वस्तर पर देश को सम्मानित किया तो वहीं देश कांग्रेस के शासनकाल में कई ऐसे काम हुए हैं जिसकी फसल आज मोदी काट रहे हैं. कांग्रेस के शासनकाल के कुछ कामों को यों गिनाया जा सकता है.

भारत में भाखड़ा और रिहंद जैसे बांध, भाभा न्यूक्लियर रिसर्च सेंटर की स्थापना, तारापुर परमाणु बिजली घर का निर्माण हो चुका है. देश भर में दर्जनों की संख्या में एम्स, आई.आई.टी., आई.आई.एम.एस और सैकड़ों की संख्या में विश्वविद्यालय और लाखों की तादाद में काॅलेजों और विद्यालयों की स्थापना हो चुकी है, जिससे बड़े पैमाने पर शिक्षा का प्रचार-प्रसार हुआ और देशवासियों को शिक्षित किया. कांग्रेस ने नेहरू के नेतृत्व में नवरत्न कम्पनियां की स्थापना कर देश में भारी उद्योगों को विकसित किया और देश भर में उद्योगों का जाल फैला दिया. ईसरो जैसी संस्थान का शुभारंभ कांग्रेस ने नेहरू के ही नेतृत्व में शुरू किया और मंगलयान जैसी यान का निर्माण भी कांग्रेस के ही शासनकाल में हुआ, जिसे मोदी ने प्रधानमंत्री बनने के बाद मंगल की यात्रा पर भेजा.

भारत में लगभग मृतप्राय बैंकों को राष्ट्रीयकृत कर कांग्रेस के ही शासनकाल में विकसित किया गया. कृषि क्रांति का नारा देकर कांग्रेस ने ही देश को खाद्यान्न के मामलों में देश को आत्मनिर्भर बनाया. सुई तक का निर्माण नहीं होने वाले इस देश में हवाई जहाज और हेलीकाॅप्टर का निर्माण होने लगा. घर-घर में टेलीविजन पहुंचाया गया. कम्प्यूटर, सुपर कम्प्यूटर के माध्यम से सूचना के क्षेत्र में क्रांति ला दिया. चन्द्रयान जैसे अभियान को सुनिश्चित किया. चांद पर मानव को उतारने जैसे काम भी कांग्रेस के ही शासनकाल में सम्भव हो पाया. जी.एस.एल.वी., मेट्रो रेल, मोनो रेल, अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे, न्यूक्लियर पनडुब्बी, हजारों मिसाईलें, दर्जनों परमाणु संयंत्र, विक्रांत जैसे विमान वाहक पोत आदि जैसी उपलब्धियां कांग्रेस के शासनकाल में ही हो पाई.

यहां तक कि जिस नीति और सिद्धांतों को आज मोदी सरकार ला रही है, वह भी कांग्रेस शासनकाल की ही देन है. चाहे वह आधार कार्ड हो, नोटबंदी जैसी व्यवस्था हो, जीएसटी जैसा कानून हो, यह सब कांग्रेस की ही देन थी, जिसे मोदी उस वक्त विरोध कर रहे थे पर प्रधानमंत्री बनते ही बड़े ही भयानक और रक्तपूर्ण तरीके से इन कानूनों को लागू किया तो वहीं जीएसटी जैसे कानून को जिसे कांग्रेस 14 प्रतिशत टैक्स के साथ लागू करना चाह रही थी, का विरोध कर मोदी ने 28 प्रतिशत भारी भरकम टैक्स के साथ जनता का खून तक चूसने वाली प्रक्रिया बना दिया है.

ऐसे में जब दरिंदगी की हद को पार कर चुकी मोदी सरकार यह कहती है कि कांग्रेस ने 60 साल में कुछ भी नहीं किया तो हंसी आती है और उनके मूर्खतापूर्ण व्यवहार की निंदा जब विश्व स्तर पर हो रही हो तो देश के लिए शर्मनाक भी हो जाता है.

आत्मप्रशंसा में अपार धनराशि खर्च करने वाली नरेन्द्र मोदी की सरकार जहां देश को अंबानी-अदानी जैसे व्यापारियों के हाथों बेच रही है, वही आम आदमी को यह बताया जा रहा है कि नरेन्द्र मोदी की सरकार में ही उसकी मुक्ति है. यह मुक्ति शायद मोक्ष की प्राप्ति भी हो. मोक्ष प्राप्ति की ललक इस देश की जनता में धर्मप्रचारकों ने कूट-कूट कर भर दिया है इसीलिए किसानों की आत्महत्या और गाय, गोबर, गो-मूत्र, गोरक्षा आदि के नाम पर आये दिन होने वाली हत्यायें लोगों को विचलित नहीं करती. वह इसे मोक्ष की प्राप्ति मानती है. मोक्ष का अर्थ मृत्यु होता है. यही कारण है कि देश में दलित, पिछड़ों, आदिवासी, महिलाओं और मुसलमानों की हत्या उसके लिए मोक्ष की प्राप्ति है अर्थात उसकी हत्या सहज है, मान्य है, स्वाभाविक है.

ठगी और ढोंग का नया रूप

धर्म जनता की अफीम है, की सच्चाई इसी बात में निहित है कि धर्म के नाम पर हत्यायें जायज ठहराई जा रही है. नरेन्द्र मोदी के सारे कुकृत्य और हत्यायें स्वाभाविक ‘बलिदान’ यानि मोक्ष बतलाया जा रहा है. शिक्षा, स्वास्थ्य को व्यवसाय बनाया जा रहा है. अत्याचार, भ्रष्टाचार को कानूनन सदाचार घोषित किया जा रहा है. लोगों की गाढ़ी कमाई को बूंद-बूंद निचोड़ डालने के लिए नोटबंदी और जीएसटी जैसे अप्रत्याशित और भयानक कदम उठाये जा रहे है. देश के राष्ट्रीय रेल, विमान सेवा को निजी हाथों में बेचा जा रहा है और बेहिसाब बढ़ती मंहगाई को लेकर खुशियां मनाई जा रही है कि देश में अच्छे दिन आ गये हैं.

जनता की तुलना सुअर और कुत्तों से की जाने लगी है और इसमें किसी को लज्जा की भी अनुभूति नहीं होती है वरन् उसे खुशी महसूस होता है. यह तो अफीम के नशे से भी ज्यादा मदहोश करने वाली धर्म का नशा है, जिसके द्वारा जनता के साथ हद दर्जे तक दुराचार किया जा रहा है, और किसी को मतलब भी नहीं रह जाता है. इससे ज्यादा मदहोशी का नशा आखिर किसमें हो सकता है ?

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2 Comments

  1. S. Chatterjee

    July 7, 2017 at 1:27 am

    सिर्फ इतना लोग याद रखें कि जब भी कोई फासिस्ट कुछ बोलता है तो झूठ ही बोलता है। बाकी बातें स्वयं स्पष्ट हो जायेगी।

    Reply

  2. cours de theatre paris

    September 30, 2017 at 4:49 am

    I am so grateful for your blog post. Much obliged.

    Reply

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