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कश्मीरियों के नरसंहार की साजिश के खिलाफ सवाल

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कश्मीरियों के नरसंहार की साजिश के खिलाफ सवाल

कश्मीर में जारी हिंदुस्तानी नाकाबंदी के आज पूरे हुए 50 दिन. यह 50 दिन पिछले 73 सालों के क्रूर सैन्य-दमन की कहानी कहते हैं, जिसके खि़लाफ़ एक-एक कश्मीरी हर दिन संघर्ष करता है. कश्मीर पहुंचे 5 सदस्यीय महिला टीम की सदस्य जिसमें एनी राजा, कवलजीत कौर, पंखुड़ी जहीर, पूनम कौशिक, साईदा हमीद ने 17-21 सितम्बर तक कश्मीर घाटी में रही. जांच टीम ने ‘द टेलीग्राफ’ को बताया कि एक छोटी बच्ची पढ़ने के लिए अपना लैंप जलाए छोड़ दी थी, यह देखते हुए सुरक्षाबलों ने उसके पिता और भाई को ‘पूछताछ’ के लिए उठा कर ले गये. स्थानीय लोगों का कहना है कि सूर्यास्त होते ही लोग घर से बाहर नहीं निकलते हैं. उन्हें अपने घरों में बत्तियां जलाने की भी इजाजत नहीं है.

1200 से भी ज़्यादा घंटों से दूरसंचार के सभी साधन-संसाधन ठप्प पड़े हैं. हिंदुस्तानी सैनिकों की संख्या बढ़ कर 10 लाख से भी ज़्यादा हुई है. 50 दिन गवाही देते हैं कश्मीरियों से छीने गए मानव और राजनैतिक अधिकारों की. 50 दिनों से कश्मीर एक असीम क़ैदख़ाने में तब्दील हो गई है. 50 दिनों से एक आम कश्मीरी को अपने परिवार, बच्चों, और प्रियजनों की कोई ख़बर नहीं है, उनसे बात तक कर पाने का कोई रास्ता नहीं है. 50 दिन बीत गए मगर स्वास्थ्य सेवाएं बाधित हैं, प्राण-रक्षक दवाइयों की किल्लत बरकरार है व फायर ब्रिगेड जैसी आपातकालीन सेवाएं तक ठप्प हैं.

50 दिनों से कश्मीर की सड़कों पर सन्नाटा और घर-घर में हाहाकार है. 5000 से अधिक लोगों की गिरफ़्तारी की पुष्टि जिसमें गंभीर यातनाएं और टॉर्चर तक शामिल है. बच्चों को न सिर्फ़ गिरफ़्तार किया है, बल्कि कई सैन्य टुकड़ियां रातों को छापे मार कर उन्हें अपने ही घरों से अगवा कर रही हैं. 17 वर्षीय उसैब ने सी.आर.पी.एफ़. के दर्जनों सैनिकों द्वारा घेरे जाने पर नदी में कूद कर जान दे दी, 16-वर्षीय असरार को पैलेट्स से छलनी कर मार डाला गया, 15 वर्षीय यावर ने सेना द्वारा प्रताड़ित किये जाने पर आत्महत्या कर ली, और 9-वर्षीय लड़कों तक को जबरन हिरासत में लिया गया. कई मौतों की पुष्टि हुई है, जिनमें बच्चे, महिलाएं और बुज़ुर्ग शामिल हैं. कभी कोई मौत पेलेट्स, बुलेट्स, रबर बुलेट्स या आंसू गैस से हुई तो कहीं दहशत में या सदमे में आत्महत्या या दिल का दौरा पड़ने से. कुछ मौतें समय पर अस्पताल न पहुंच पाने की वजह से भी हुईं. कई मरीज़ों की हालत अभी भी नाज़ुक है. घरों में घुस कर या सड़कों पर प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाते हुए हिंदुस्तानी फौजी सैंकड़ों कश्मीरियों को गंभीर रूप से ज़ख़्मी कर रहे हैं. 500 से ज़्यादा घायल
कश्मीर के अलग-अलग कोनों से हुए. 500 से अधिक विरोध प्रदर्शनों की ख़बरें आये दिन आ रही है.

स्थानीय पत्रकारों की गिरफ्तारी और ख़बर पहुंचाने में रोक-टोक, सुरक्षाबलों द्वारा पत्रकारों के फुटेज ज़बरन मिटाया जाना. मुहर्रम के महीने में जुलूस में शामिल लोगों को पीटा गया. पेलेट्स व आंसू गैस का इस्तेमाल और छोटे बच्चों को बेरहम यातनाएं दी गईं. कई इलाक़ों में हिंदुस्तानी सेना ने महिलाओं पर अभद्र टिप्पणी की, छेड़खानी और यौन हिंसा की ख़बरें भी आये दिन सामने आ रही है. डॉक्टरों पर दबाव है कि अस्पताल-भर्ती रिकॉर्डों में मृतकों की संख्या कम रखी जाए. मृत्यु प्रमाण-पत्र जारी न करने के सख़्त निर्देश दिये गये हैं. कश्मीर में बिगड़ते स्वास्थ्य संकट के बारे में लोगों को जागरुक कर रहे कश्मीरी डॉक्टर ओमर को हिरासत में ले लिया गया; उनका अभी तक कोई पता नहीं है.

हिन्दुस्तानी मीडिया का दुष्प्रचार जारी है और कश्मीरी पत्रकारों को प्रताड़ित किया जा रहा है. श्रीनगर में कुछ पत्रकारों को पैलेट्स से घायल किया गया. दो को पीटा गया, एक का कैमरा तोड़ा गया, दर्जनों पत्रकारों की फुटेज व रिपोर्ट्स को ज़बरदस्ती मिटाई गईं. सूचना मिली कि कुछ पत्रकारों को हिरासत में लेकर टॉर्चर किया जा रहा है.

उत्तर प्रदेश की जेलों में भरे गए कश्मीरियों के परिवारों को पूरी सूचना नहीं दी जा रही है या न्यायिक सहायता नहीं दी जा रही है. अपने प्रियजनों से मिलने के लिए संघर्ष करते सैंकड़ों लोगों की आंखें पथरा गई है. दहशत के माहौल में कश्मीरी माता-पिता अपने बच्चों को स्कूलों से दूर रखने पर मजबूर हैं. यातनाएं बद से बद्तर – कई कश्मीरियों को मारा गया, बिजली के झटके दिए गए, कचरा व गोबर खाने को अथवा गन्दा पानी पीने को मजबूर किया गया. कुछ जगह तो ज़बरदस्ती शराब व मूत्र तक पिलाया गया. उनके खाने के सामान को विषैला बनाकर खराब किया गया. पालतू पशुओं को मार डाला गया और उनके घरों की महिलाओं/लड़कियों को उठा ले जाने और जबरन उनसे शादी करने की धमकी दी गयी. भाजपा के गुंडें तो गुंडें उसके मंत्री, विधायक, सांसद, मुख्यमंत्री तक कश्मीरी लड़कियों के साथ बलात्कार करने, उसके साथ ‘शादी’ करने की धमकी दिया जा रहा है.

पूरे कश्मीर में नरसंहार का खतरा मंडरा रहा है. कई अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों, विख्यात राजनैतिक हस्तियों व नेताओं ने कश्मीर के कौमी संघर्ष के समर्थन में अपनी आवाज़ बुलंद की है. पिछले दिनों में सौरा में प्रतिबंध के बावजूद हजारों की तादाद में लोगों ने प्रदर्शन किये. बंगलादेश में लाखों लोगों ने कश्मीरियों के दर्द को महसूस किया और प्रदर्शन किये. मोदी के अमेरिका में ट्रंप के समर्थन में 1.4 लाख करोड़ खर्च कर किये गये ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम के विरोध में हजारों अमरीकियों ने मोदी के खिलाफ प्रदर्शन किये और ‘मोदी मुर्दावाद’ और ‘फासिस्ट मोदी वापस जाओ’ के नारे लगाये. पूरे दुनिया की जनता मोदी के इस खूख्वांर षड्यंत्र के खिलाफ कश्मीरी जनता के समर्थन में आवाज बुलंद कर रहे हैं. आज कश्मीर की जनता को खून के नदी में डुबों देने के खिलाफ आवाज वक्त की जरूरत हैं, क्योंकि अगर आज कश्मीर की जनता के समर्थन में आवाज नहीं उठाया गया तो कल यह पूरे भारत का भविष्य बनने वाला है.

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