Home लघुकथा कोर्ट में न्याय

कोर्ट में न्याय

0 second read
0
0
585

जिला अदालत के कठघरे में हाथ जोड़े खड़ा बौदु जज की ओर टकटकी बाधे देख रहा था. उसके हाथों में हथकड़ी लगी थी और वह भागने न पाये इसलिए दो पुलिसिया पीछे खड़ा था.

कागजातों का निरीक्षण करने के बाद जज ने अपना भारी सा टकला सर उठाया और बौदु की ओर देखते हुए गहरी सांस लेते हुए कहा –

जज – हां जी, तुम पर आर्म्स रखने का आरोप है. क्या तुम इस अपराध को स्वीकार करते हो ?

बौदु – जी हुजूर.

जज – मतलब तुम्हारे पास से दो गोलियां बरामद की गई थी, क्या यह सच है ?

बौदु – जी हुजूर.

जज – अदालत तुम्हें अपराधी मानते हुए तीन साल का सजा सुनाती है.

बौदु – जी हुजूर.

जज – तुमने जेल में करीब पांच साल बिताया है ?

बौदु – जी हुजूर.

जज – तुम्हारी सजा पूरी हो गई है इसलिए अब कोर्ट तुमको रिहा करती है.

बौदु – जी हुजूर.

उसी शाम आर्म्स एक्ट की धारा में अधिकतम 3 साल के बजाय पांच सालों से जेल में बंद बौदु रिहा हो जाता है.

[प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे…]

Load More Related Articles
Load More By ROHIT SHARMA
  • आग का बीज

    एक छोटे गांव में एक विधवा स्त्री पेलाग्रे रहती थी, जिसका बेटा पावेल मजदूरों की हड़ताल में …
  • सोचेगा सिर्फ राजा…या फिर बागी, सोचना बगावत हुई

    मुखबिर की खबर पर, पुलिस बल थाने से निकला. सशस्त्र जवानों ने जंगल में उजाड़ खंडहर घेर लिया. …
  • आखिर बना क्या है फिर ?

    एक अप्रवासी भारतीय काफी समय बाद भारत वापस लौटता है. एयरपोर्ट पर उतरते ही उसको लेने आये अपन…
Load More In लघुकथा

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also

‘Coup pour Coup’ (Blow for Blow) : फ्रांस के टेक्सटाइल महिला मजदूरों की कहानी

‘Coup pour Coup’ (Blow for Blow). यह फिल्म फ्रांस के टेक्सटाइल महिला मजदूरों की कहानी है. …