Home कविताएं विश्व हिंदी सम्मेलन

विश्व हिंदी सम्मेलन

0 second read
0
0
657

विश्व हिंदी सम्मेलन

जिस भाषा में हम बिलखते हैं
और बहाते हैं आंसू
वे उस पर करते हैं सवारी
भरते हैं उड़ान उत्तुंग आसमानों में

एक कहता है मैं नहीं गया
मुझे गिना जाये त्यागियों में
एक कहता है
मैं चला गया
मुझे गिना जाये भागियों में

एक आसमान से गिरा रहा था सूचियां
हिंदी पट्टी के सूखे मैदानों पर

हिंदी के एक नये शेख ने
बना रखा था सरकारी कमेटियों का हरम
एक से निकलकर दूसरे में जाता हुआ

एक मूल में नष्ट हो रहा था
दूसरा ब्याज में और तीसरा लिहाज़ में

एक चिल्लाता था
मैं जीवन भर होता रहा अपमानित
अब मुझे भी किया जाये सम्मानित.

एक कहता था
मुझे दे दिया जाये सारा पैसा
मैं उसका डॉलर में अनुवाद करूंगा.
एक कहता था नहीं
सिर्फ़ मैं ही बजा सकता हूंं
यह असाध्य वीणा.

एक साम्राज्यवादी,
एक सम्प्रदायवादी के गले में
फूलमालाएं डाल रहा था
एक स्त्री किसी निर्दोष के रक्त से
करती थी विज्ञप्तियों पर हस्ताक्षर.

यह एक अजीब शामिल बाजा था
जिसमें एक बाज़ारू गायक
अश्लील भजन गा रहा था.

एक सम्पादक
विदेश राज्य मंत्री के जूते में
निर्जनता ढूंढ रहा था.
एक पत्रकार का
शास्त्री भवन की एक दराज़ में
स्थायी निवास था.

एक कहता था मैं इतालवी में मरूंगा.
एक स्पेनिश में अप्रासंगिक होना चाहता था.
एक किसी लुप्त प्रायः भाषा के पीछे
छिपता फिरता था.

एक रूठ गया था
एक को मनाया जा रहा था
एक आचार्य जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय
में कराह रहा था.
एक मसखरा
मुक्तिबोध पर व्याख्यान दे रहा था.

एक मृतक
ब्रिटिश एयरवेज के पंखों से लिपटा हुआ था
दूसरा मृतक
भविष्य में होने वाली
सभी गोष्ठियों की अध्यक्षता कर चुका था.
एक आत्मा
आगामी बरसों के
सभी प्रतिनिधि मंडलों में घुसी हुई थी.

यह भूमंडलीकरण का अजब नज़ारा था कि
सोहो के एक भड़कीले वैश्यालय में
हिंदी का लंगोट लटक रहा था.

और दूर पूरब में
और धुर रेगिस्तान के किसी गांव में
जन्म लेता हुआ बच्चा
जिस भाषा में तुतलाता था
उसे हिंदी कहा जाता था.

कहां खो गया प्रतिरोध
क्या भविष्य में सिर्फ़
भिखारियों के काम आयेगी
यह महान भाषा.

इसी भाषा में एक कवि
दो टूक कलेजे के करता पछताता
लिखता जाता था कविता
और फाड़ता जाता था !

  • कृष्ण कल्पित

प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे…]

Load More Related Articles
Load More By ROHIT SHARMA
Load More In कविताएं

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also

‘Coup pour Coup’ (Blow for Blow) : फ्रांस के टेक्सटाइल महिला मजदूरों की कहानी

‘Coup pour Coup’ (Blow for Blow). यह फिल्म फ्रांस के टेक्सटाइल महिला मजदूरों की कहानी है. …