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शोषण और बलात्कार का केन्द्र बना बाल गृह

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टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंस (TISS)

टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंस (TISS) के “कोशिश” ग्रुप ने बिहार सरकार के समाज कल्याण विभाग के आग्रह पर बिहार के 38 जिलों में 110 बाल गृहों का सोशल ऑडिट किया. इस रिपोर्ट में 15 बालगृहों में बच्चों की स्थिति और उनके शोषण पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई थी. 27 अप्रैल 2018 को बिहार सरकार को रिपोर्ट सौंप दी गई थी जिस पर 31 मई को कार्यवाही हुई और मुज्जफरपुर बालिका गृह के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई. मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर का सत्ता के गलियारों में आना-जाना रहता है इसलिए सरकार की शह पर ये सब करते रहे. बच्चों के शोषण से जुड़े तमाम वीभत्स पहलू सामने आ रहें हैं. नशे के इंजेक्शन लगाकर बच्चियों के साथ रेप किया जाता, पीटा जाता, भूखा रखा जाता, तरह-तरह से उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता.

42 में से 34 लड़कियों के साथ बलात्कार हुआ था. वहांं रही लड़कियों ने यह भी बयान दिया था लड़की को वहां के कर्मचारियों ने बात न मानने पर पीट-पीटकर मार डाला था जिसे बाद में उसे बालिका गृह परिसर में ही दफना दिया गया. तेजस्वी यादव ने यह मामला सदन में उठाया इसके बाद सरकार की आंंखे खुली. पर फ़िलहाल अब तक भी बिहार सरकार की तरफ से कोई स्टेटमेंट नहीं आया है. रिपोर्ट में बाकी जिन 14 संस्थानों का जिक्र है उस पर कोई कार्यवाही हुई या नहीं यह भी सरकार नहीं बता रही है.

ये है उन संस्थानों की सूची जिसका जिक्र “कोशिश” ग्रुप ने अपनी रिपोर्ट में बिहार सरकार से किया था –

1. सेवा संकल्प एवं विकास समिति, मुजफ्फरपुर (बालिका गृह)
2. निर्देश, मोतीहारी (बाल गृह)
3. रुपम प्रगति समाज समिति, भागलपुर (बाल गृह)
4. पनाह, मुंगेर (बाल गृह)
5. दाउदनगर ऑर्गनाइजेशन फॉर रुरल डेवलपमेंट (डीओआरडी), गया (बालगृह)
6. नारी गुंजन- पटना, आरवीईएसके- मधुबनी, ज्ञान भारती- कैमूर (ए़डॉप्शन एजेंसी)
7. ऑबजर्वेशन होम, अररिया
8. इंस्टिट्युट ऑफ खादी एग्रीकल्चर एंड रुरल डेवलपमेंट (आइकेआरडी), पटना (महिला अल्पावास गृह)
9. सखी, मोतीहारी, महिला अल्पावास गृह
10. नोवेल्टी वेल्फेयर सोसायटी, महिला अल्पावास गृह, मुंगेर
11. महिला चेतना विकास मंडल, महिला अल्पावास गृह, मधेपुरा
12. ग्राम स्वराज सेवा संस्थान, महिला अल्पावास गृह, कैमूर
13. सेवा कुटीर, मुजफ्फरपुर
14. सेवा कुटीर, गया
15. कौशल कुटीर, पटना

इन सभी बाल गृहों में बच्चों को अमानवीय जीवन जीने को मजबूर किया जा रहा है. ये सब बिना सरकार की शह के सम्भव नहीं है.

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